आजादी के बलिदानियों को इन गीतों ने दी प्रेरणा, आज भी भारतीयों को लुभाते हैं

देश को आजाद कराने के लिए आंदोलन करने व अपना जीवन आहूत करने के लिए कविताओं और गीतों का भी खासा योगदान है।

आजादी के बलिदानियों को इन गीतों ने दी प्रेरणा, आज भी भारतीयों को लुभाते हैं

रविवार 15 अगस्त को भारत को आजाद हुए पूरे 75 वर्ष हो जाएंगे। देश को आजाद कराने में कितने ही वीरों ने अपना खून बहाया है। यह दिन आजाद होकर खुशी मनाने का तो दिन है ही, साथ ही उन वीर सपूतों के बलिदान को भी याद करने का दिन है। देश को आजाद कराने के लिए आंदोलन करने व अपना जीवन आहूत करने वालों ने इंकलाबी नारों से प्रेरणा तो पाई ही साथ ही उन्होंने कविताओं और गीतों का भी सहारा लिया। इनको गाते हुए युवा फांसी पर झूल गए तो हजारों लाखों लोग देश को स्वतंत्र कराने के लिए प्रेरित हुए।

आजादी के बाद भी देशभक्ति से जुड़े गीतों का दौर चलता रहा। आज भी जब देश पर कोई संकट आता है या हम स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस आदि मनाते हैं जो उस वक्त इन गीतों को हम बरबस ही गुनगुनाने लग जाते हैं। भारत में लंबी श्रृंखला है देशभक्ति से जुड़े गीतों की। आइए हम याद करते हैं देशभक्ति की भावना से परिपूर्ण कुछ चुनिंदा गीतों को, जिन्होंने देश को परतंत्रता की बेड़ी से मुक्त करवाया और ये गीत आज भी हमें आजादी की कीमत बताते रहते हैं। इतने भावप्रण हैं ये गीत कि आज भी लोगों की जुबान पर आ जाते हैं।

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कवि रविन्‍द्र नाथ टैगोर द्वारा "जन गण मन" के नाम से प्रख्‍यात शब्‍दों और संगीत की रचना भारत का राष्‍ट्र गान है। राष्‍ट्र गान के सही संस्‍करण के बारे में समय समय पर अनुदेश जारी किए गए हैं, इनमें वे अवसर जिन पर इसे बजाया या गाया जाना चाहिए और इन अवसरों पर उचित गौरव का पालन करने के लिए राष्‍ट्र गान को सम्‍मान देने की आवश्‍यकता के बारे में बताया जाता है। राष्‍ट्र गान की पहली और अंतिम पंक्तियों के साथ एक संक्षिप्‍त संस्‍करण भी कुछ विशिष्‍ट अवसरों पर बजाया जाता है।

वन्‍दे मातरम गीत बंकिम चन्‍द्र चटर्जी द्वारा संस्‍कृत में रचा गया। यह स्‍वतंत्रता की लड़ाई में लोगों के लिए प्ररेणा का स्रोत था। इसका स्‍थान जन गण मन के बराबर है। इसे पहली बार 1896 में भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस के सत्र में गाया गया था। इसका पहला अंतरा इस प्रकार है:

'सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्तां हमारा', यह वही गीत है जिसे आपने बचपन में स्कूल असेम्बली में गाया होगा। यह वही गीत है जिसे आप देश के राष्ट्रीय पर्वों पर गाते हैं और यह वही गीत है जब आपसे कोई पूछता है कि भारत के बारे में आप क्या सोचते हैं तो आप जवाब में बस इसे गुनगुना भर देते हैं। इस गीत को लिखने वाले शायर, दार्शनिक मोहम्मद इक़बाल हैं।

'सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है' गीत हर राष्ट्रीय पर्व का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। भारत के स्वतंत्रता संघर्ष का बेहद अहम हिस्सा रहा है यह गीत।  

दे दी हमें आज़ादी... भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने वाले इस गीत को संगीबद्ध किया है हेमंत कुमार ने और इसे गाया है आशा भोसले ने। इसे लिखा था कवि प्रदीप ने। ये गीत फ़िल्म 'जागृति' का है।