आजादी के 75वें साल का जश्न एवरेस्ट पर मनाना चाहता है यह भारतीय

रोहताश ने एवरेस्ट के लिए प्रयास 2017 में शुरू किया जब पहलगाम में इंडियन आर्मी के कैम्प में ट्रैकिंग की ट्रेनिंग ली और उसके बाद उसी साल हिमालयन इंस्टिट्यूट ऑफ मॉनटेनियरिंग में प्रशिक्षण पूरा किया। वह पहले भारतीय हैं जिन्होंने माउंट एल्ब्रुस पर समर और विंटर दोनों ही सीजन में चढ़ाई पूरी की है।

आजादी के 75वें साल का जश्न एवरेस्ट पर मनाना चाहता है यह भारतीय
एवरेस्ट पर भारत के युवा पर्वतारोही रोहताश खिलेरी

स्कूल के समय भारत के राज्य हरियाणा के जिला हिसार के महावीर स्टेडियम जाने के लिए जो किसान पिता अपने बेटे को 3 रुपये नहीं देना चाहते थे, उसी पिता ने बेटे के माउंट एवरेस्ट को फतह करने का सपना पूरा करने के लिए 22 लाख रुपये का इंतजाम कुछ घंटों में कर दिया। बेटे के खेल में रुचि न लेने वाले पिता का हृदय परिवर्तन बेटे की कड़ी मेहनत और जुनून का ही नतीजा था और इस मेहनत ने भारत के इस पर्वतारोही को दुनिया के रिकॉर्डधारियों की श्रेणी में ला खड़ा किया है।

हम बात कर रहे हैं हरियाणा के युवा पर्वतारोही रोहताश खिलेरी की, जो माउंट एवरेस्ट पर 24 घंटे रुकने का रिकॉर्ड बनाने के लिए चंद दिनों बाद ही अपने घर से कूच करने वाले हैं। रोहताश के शब्दों में कहें तो इस रिकॉर्ड को बनाने की संभावना 0.01 प्रतिशत होती है लेकिन इस आंकड़े से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्हें तो केवल अपने सपने को पूरा करना है और 'आजादी के अमृत महोत्सव' पर देश के तिरंगे को एवरेस्ट की चोटी पर 24 घंटे लहराना है। रोहताश की अब तक की यात्रा, उनकी प्रेरणा, उनके संघर्ष और भविष्य को लेकर उनकी योजनाओं पर इंडियन स्टार ने उनसे बात की...

एवरेस्ट फतह: कहां से मिली प्रेरणा ?

जब हमने रोहताश से पूछा कि एवरेस्ट फतह करने का जुनून कब उनके सिर चढ़ा? रोहताश ने बताया, 'मैं मार्शल आर्ट्स प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए 2014 में नेपाल गया था। हरियाणा मैदानी इलाका है तो मैंने कभी पहाड़ नहीं देखे थे। नेपाल जाकर पहली बार मैंने पहाड़ की खूबसूरती देखी। तभी से मैंने यह तय कर लिया था कि एक एवरेस्ट की चढ़ाई करूंगा।' रोहताश ने एवरेस्ट के लिए प्रयास 2017 में शुरू किया, जब पहलगाम में इंडियन आर्मी के कैम्प में ट्रेनिंग ली और उसके बाद उसी साल हिमालयन इंस्टिट्यूट ऑफ मॉनटेनियरिंग में प्रशिक्षण पूरा किया।