अपने लोग: 'हवा के खिलाफ' खड़े हो कर US में ऐसे बनाई जगह, कमाया नाम

1999 में कंपनी ने एच1 वीजा पर उन्हें अमेरिका भेजा लेकिन चरणजीत किसी के अंदर काम करने के इच्छुक नहीं थे और कुछ महीने के अंदर ही अपनी कंपनी खड़ी कर ली जिसका नाम टेक्सट्रम रखा। यह कंपनी सॉफ्टवेयर टेस्टिंग का काम करती है जिसके भारत और कनाडा में भी ब्रांच हैं।

अपने लोग: 'हवा के खिलाफ' खड़े हो कर US में ऐसे बनाई जगह, कमाया नाम
पत्नी हरप्रीत कौर मिन्हास के साथ चरणजीत सिंह मिन्हास

नब्बे के दशक के शुरुआती सालों में भारत के पंजाब राज्य के शहर पटियाला से निकला एक युवा अवसर की तलाश में राजधानी दिल्ली पहुंचता है और वहां जो संघर्ष झेलता है उससे सीख लेकर जीवन में और मेहनत करता है और एक दिन यह मेहनत उसे पहुंचाती है अमेरिका। अमेरिका में अब यह युवा जीवन के 5वें दशक में है, न केवल वह दो आईटी कंपनियों के मालिक हैं बल्कि इस पश्चिमी देश के संसद में पास होने वाले कानून के लिए लॉबिंग भी करते हैं। यह कहानी है कि एनआरआई चरणजीत सिंह मिन्हास की। इंडियन स्टार से बातचीत में चरणजीत सिंह ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि 'जब हवा आपके खिलाफ जाती है तो आपको और ऊंचा उठाती है।' अपने जीवन में इसी 'मोटो' के साथ आगे बढ़ते रहे हैं मिन्हास।

दिल्ली की बरसाती से डेलावेयर के नूवार्क तक

चरणजीत ने बातचीत की शुरुआत भारत में अपने संघर्ष के दिनों से की, जब इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह 1992 में दिल्ली पहुंचे थे। वह बताते हैं कि तब उन्हें 2000 रुपये सैलरी मिलती थी और उनमें से 500 रुपये घर के किराए में चले जाते थे। जनता फ्लैट में रहना और फिर खाने से लेकर पानी तक के लिए एक-एक पैसे जोड़ना, इसने उन्हें बहुत कुछ सिखाया। चरणजीत बताते हैं कि इन सब अनुभवों से ही मैंने यह फैसला किया कि कभी मेट्रो शहर में नहीं बसूंगा।

भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला के साथ मिन्हास परिवार