ग्रीन कार्ड: हनुमानजी की पूंछ बनती लंबित आवेदनों की संख्या, भारत सबसे ज्यादा प्रभावित

ग्रीन कार्ड के लिए अनुमति प्राप्त कर चुके ऐसे आप्रवासियों की संख्या आसमान छू रही है जो इसकी सीमा पूरी होने की वजह से आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। रोजगार आधारित श्रेणी में सरकार हर साल 1.40 लाख ग्रीन कार्ड जारी करती है।

ग्रीन कार्ड: हनुमानजी की पूंछ बनती लंबित आवेदनों की संख्या, भारत सबसे ज्यादा प्रभावित

अमेरिका में ग्रीन कार्ड बैकलॉग वर्तमान में एक वर्ष में रोजगार आधारित श्रेणियों के लिए उपलब्ध ग्रीन कार्ड की संख्या का लगभग दस गुना है। आप्रवासियों के लगभग 90,000 बच्चों की अपने ग्रीन कार्ड के लिए इंतजार करते-करते उनती पात्रता आयु गुजर जाएगी। इनमें से अधिकांश आप्रवासी भारतीय हैं। रोजगार आधारित बैकलॉग में अनुमति प्राप्त आवेदकों में से 82 फीसदी का जन्म भारत में हुआ था।

ये दावा वाशिंगटन के थिंक टैंक सीएटीओ इंस्टीट्यूट (CATO Institute) के नए अध्ययन में किया गया है। अध्ययन में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि किस तरह ग्रीन कार्ड के निर्धारित प्रति देश की सीमा कई उच्च कुशल पेशेवरों के लिए संकट खड़ा कर रही है। भारतीय पेशेवर इससे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

अमेरिका में प्रवासी भारतीयों से मिलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। 

अमेरिका में वैध स्थायी निवास प्राप्त करने के लिए एक रोजगार आधारित आप्रवासी को लेकर नियोक्ता की ओर से एक याचिका पेश की जानी आवश्यक होती है। इसमें नियोक्ता यह अनुरोध करता है कि सरकार की ओर से आप्रवासी को ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने की अनुमति प्रदान की जाए। याचिका स्वीकृत होने के बाद भी अगर ग्रीन कार्ड की सीमा पूरी हो गई है तो वह आवेदन नहीं कर सकता।

कांग्रेस ने ग्रीन कार्ड की सीमा पिछली बार 30 साल पहले अपडेट की थी। इसके बाद से मांग लगातार बढ़ती ही जा रही है। ग्रीन कार्ड के लिए अनुमति प्राप्त कर चुके ऐसे आप्रवासियों की संख्या आसमान छू रही है जो इसकी सीमा पूरी होने की वजह से आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। रोजगार आधारित श्रेणी में सरकार हर साल 1.40 लाख ग्रीन कार्ड जारी करती है। इन्हें पाने वाले अधिकांश भारतीय होते हैं।

अध्ययन के अनुसार सरकार रोजगार आधारित आप्रवासियों को जारी किए जाने वाले हर ग्रीन कार्ड के लिए दो याचिकाओं को अनुमति दे रही है। वर्तमान में जिस रफ्तार से इनकी संख्या बढ़ती जा रही है 2030 तक इस बैकलॉग के 24 लाख से अधिक होने की उम्मीद है। रोजगार आधारित बैकलॉग में कुशल भारतीयों की भागीदारी करीब 75 फीसदी है। इनके लिए इंतजार की अवधि बहुत लंबी हो गई है।

रिपोर्ट बताती है कि भारतीयों के लिए दो लाख से अधिक याचिकाएं एक्सपायर हो सकती हैं क्योंकि अधिक उम्र के चलते लोगों की ग्रीन कार्ड पाने से पहले मृत्यु होने की आशंका है। अनुमति प्राप्त रोजगार आधारित बैकलॉग में शामिल 82 फीसदी लोगों का जन्म भारत में हुआ था। इसके अलावा इस बैकलॉग में 12 फीसदी आवेदक चीन में पैदा हुए थे और बाकी बचे हुए आवेदक दुनिया के अन्य देशों से हैं।