सिंगापुर: दो भारतीय वकीलों ने दोषी को फांसी से बचाने के लिए दायर की थीं अपीलें, क्यों लगा जुर्माना?

धर्मलिंगम को साल 2010 में 42.72 ग्राम हेरोइन की तस्करी का दोषी पाया गया था और उसे मौत की सजा दी गई थी। साल 2011 में उसने सजा के खिलाफ पहली अपील डाली थी जिसे खारिज कर दिया गया था। इन वर्षों में धर्मलिंगम ने अपनी मौत की सजा को चुनौती देने के लिए कुल सात आवेदन दायर किए थे।

सिंगापुर: दो भारतीय वकीलों ने दोषी को फांसी से बचाने के लिए दायर की थीं अपीलें, क्यों लगा जुर्माना?

अप्रैल में भारतीय मूल के मलेशियाई ड्रग तस्कर नाग्रेंथ्रन के धर्मलिंगम को सिंगापुर में गत अप्रैल माह में फांसी दी गई थी। इस सजा को रोकने के तर्कहीन प्रयासों के लिए सिंगापुर के अटॉर्नी जनरल ऑफ चैंबर्स (AGC) ने दो भारतीय मूल के ​वकीलों पर 11,27,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। इसमें 75 फीसदी जुर्माना एम रवि नाम के वकील को देना होगा, जिन्होंने धर्मलिंगम के मामले का अधिकांश काम संभाला था, जबकि वायलेट नेट्टो नाम के दूसरे वकील को बाकी 25 फीसदी ​देना होगा। दरअसल नेट्टो ने वकील के रूप में पदभार बाद में संभाला था।

नाग्रेंथन के धर्मलिंगम को 27 अप्रैल 2022 को सिंगापुर की चांगी जेल परिसर में फांसी दी गई थी।

मिली जानकारी के अनुसार AGC ने दोनों वकीलों पर अन्यथा आवेदन दायर करके धर्मलिंगम के निष्पादन की देरी करने के लिए असल में 2,254,350 रुपये का जुर्माना लगाया था। AGC के मुताबिक दोनों वकीलों की वजह से अनावश्यक खर्च हुआ था। नाग्रेंथन के धर्मलिंगम को गत 27 अप्रैल को सिंगापुर की चांगी जेल परिसर में फांसी दी गई थी।

धर्मलिंगम को साल 2010 में 42.72 ग्राम हेरोइन की तस्करी का दोषी पाया गया था और उसे मौत की सजा दी गई थी। साल 2011 में उसने सजा के खिलाफ पहली अपील डाली थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इन वर्षों में धर्मलिंगम ने अपनी मौत की सजा को चुनौती देने के लिए कुल सात आवेदन दायर किए थे। 26 अप्रैल को धर्मलिंगम की मां द्वारा पुन: निर्धारित निष्पादन को रोकने के लिए एक अंतिम-मिनट के आवेदन को भी अदालत ने खारिज कर दिया था।

बुधवार को सिंगापुर के मुख्य न्यायाधीश सुंदरेश मेनन के नेतृत्व में पांच न्यायाधीशों की अपील कोर्ट ने कहा कि वकीलों के पास तथ्यों का अभाव था। जिस तरह से मामले को अंजाम दिया गया, वह अदालती प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग था। धर्मलिंगम के वकील रवि ने अदालत में एक आवेदन मनोचिकित्सा से भी जुड़ा दायर किया था, जिसकी मदद से उसकी फांसी रोकने की मांग की गई थी। ​रवि ने तर्क दिया था कि धर्मलिंगम को मौत की सजा नहीं दी जा सकती क्योंकि वह मानसिक रूप से अक्षम था। जबकि 29 मार्च को अदालत ने अपील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामला निराधार है और दोषी धर्मलिंगम की मानसिक स्थिति में गिरावट का कोई सबूत नहीं है।