भारतीय डॉक्टर ने क्यों लिया अमेरिका छोड़ने का निर्णय, क्यों लौट आए अपने वतन

डॉ. सिंह कहते हैं कि महामारी ने उनकी आखें खोल दीं। यहां समझ आया कि अपना जान जोखिम में डालकर वह अमेरिका में रोगियों की देखभाल कर रहे हैं। लेकिन महामारी से उन्हें कुछ हो जाता तो उनकी पत्नी और बेटी का वीजा खत्म हो जाता और उन्हें वापस भारत भेज दिया जाता।

भारतीय डॉक्टर ने क्यों लिया अमेरिका छोड़ने का निर्णय, क्यों लौट आए अपने वतन

अमेरिका में 15 साल से रह रहे एक भारतीय ने भारत वापस जाने का फैसला किया और वह अब भारत की राजधानी दिल्ली में नौकरी कर रहे हैं। वजह है ग्रीन कार्ड। अमेरिका में सालों से रह रहे भारतीयों के लिए यह समस्या आम है और इसका जीता जागता उदाहरण हैं डॉ. प्रणब सिंह जो अमेरिका में साल 2006 में आए थे। डॉ. सिंह एक फिजिशियन हैं।

डॉ. प्रणब सिंह ने एक न्यूज वेबसाइट को दिए साक्षात्कार में बताया कि वह अब परमानेंट नई दिल्ली बसने जा रहे हैं। वह ग्रीन कार्ड बैकलॉग से परेशान थे जिस कारण उन्होंने यह फैसला किया। इसके अलावा उनकी 16 साल की बेटी है जो भारतीय नागरिक है उसको भी ग्रीन कार्ड मिलता नहीं दिख रहा है। दरअसल डॉ. प्रणब H-1B वीजा धारक हैं और H-1B वीजा धारकों के आश्रित बच्चे जैसे ही 21 वर्ष के होते हैं वह ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं।

सिंह ने बताया कि उन्हें खुद ग्रीन कार्ड ​अनुमानित दिसंबर 2013 में मिल जाना चाहिए था लेकिन उन्हें ग्रीन कार्ड नहीं मिला। उन्होंने बताया कि अगर उनकी बेटी की उम्र हो जाती है तो उनकी बेटी को भारत स्व-निर्वासित करना होता। फिर उसे अमेरिका में फिर से प्रवेश करने के लिए F-1 वीजा प्राप्त करना होता। वह जीवन भर अमेरिका में रहने के बाद वीजा अधिकारी की दया पर रहती। अमेरिकी वीजा के लिए आवेदन करने के लिए उसे यह साबित करना होता कि उसका आप्रवासन करने का कोई इरादा नहीं है।